Zaan Farzaan

4 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की सरज़मीं पर जन्मे ज़ान फ़रज़ान, जिनका असली नाम फ़रज़ान ख़ान है, समकालीन उर्दू अदब की उभरती हुई आवाज़ों में शुमार किए जाते हैं। आपने ज़ाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज से वाणिज्य (बी.कॉम.) में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की, मगर दिल की दुनिया हमेशा अल्फ़ाज़, एहसास और शायरी से आबाद रही।

ज़ान फ़रज़ान की शायरी महज़ अश्आर का सिलसिला नहीं, बल्कि जज़्बात की एक ऐसी दास्तान है जिसमें मोहब्बत, हिज्र, उम्मीद, तन्हाई, ख़ामोशी, इंसानी रिश्ते और ज़िंदगी की नर्म-ओ-नाज़ुक कैफ़ियतें पूरे ख़ुलूस के साथ झलकती हैं।

अब तक आप दर्जनों ग़ज़लें, नज़्में और अश्आर तख़्लीक़ कर चुके हैं। आपकी तहरीरों की सबसे बड़ी ख़ूबी उनकी सादगी में छिपी गहराई है। आप मुश्किल एहसासात को भी ऐसे अल्फ़ाज़ में बयान करते हैं जो सीधे दिल तक पहुँचते हैं। आपकी शायरी में रिवायती उर्दू लहजे की नफ़ासत भी है और आज के दौर की सच्ची कैफ़ियत भी, जिससे हर क़ारी ख़ुद को कहीं न कहीं उन अल्फ़ाज़ में महसूस करता है।

ज़ान फ़रज़ान के लिए शायरी महज़ फ़न नहीं, बल्कि एहसासात को अमर कर देने का एक ज़रिया है। उनका यक़ीन है कि अल्फ़ाज़ तब सबसे ज़्यादा ख़ूबसूरत होते हैं जब वे किसी के दिल में ख़ामोशी से उतर जाएँ।

इस वेबसाइट पर ज़ान फ़रज़ान की ग़ज़लें, नज़्में और अन्य अदबी तहरीरें एक जगह संकलित की गई हैं, ताकि क़ारी उनकी तख़्लीक़ात तक आसानी से पहुँच सकें।