ग़ज़लों और नज़्मों का संग्रह

ज़ान फ़रज़ान

इक आरज़ू हो गर तो हों हज़ार काविशें किसे मिला है कुछ यहाँ पे सिर्फ़ चाह से
— ज़ान फ़रज़ान
Ek Sher

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