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ज़ान फ़रज़ान की नज़्म: कमाल आदमी हो

Nazm · #4

कमाल आदमी हो

कमाल आदमी हो
मोहब्बत करी जब किसी से
तो बस इस क़दर की
के उस शख़्स के वास्ते फिर
ये दोनों जहाँ छोड़ डाले
मगर जब भी रक्खी अदावत किसी से
तो इस दर्जा रक्खी
के अगले को मानो
कहीं का न छोड़ा

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Roman Transliteration

Kamaal Aadmi Ho

Kamaal aadmi ho
Mohabbat kari jab kisi se
To bas is qadar ki
Ke us shakhs ke waaste phir
Ye donon jahaan chhod daale
Magar jab bhi rakkhi adaawat kisi se
To is darja rakkhi
Ke agle ko maano
Kahin ka na chhoda